Thursday, March 22, 2012


Wednesday, March 21, 2012

देश का नेता कोई नहीं

वर्तमान में देश में राष्ट्रीय स्तर का किसी भी राष्ट्रीय राजनितिक पार्टियों में एक भी नेता नहीं जो पूरे देश में सामान रूप से सम्मानित हो.ऐसा लगता है की जवाहर लाल नेहरु ,नेता जी सुभाष चन्द्र बोस,लाल बहादुर शास्त्री ,इंदिरा गाँधी,मोरार जी भाई ,राजीव गाँधी तथा अटल बिहारी बाजपाई के बाद कोई नेता ऐसा नहीं है जिसे सम्पूर्ण देश में एक सामान नेता स्वीकार किया गया हो. सामान्य रूप से यह मान्यता रही है की प्रधान मंत्री देश का नेता हुआ करता था.किन्तु इस परम्परा को चरण सिंह,चन्द्रशेखर, बी पी सिंह,देव गौड़ा और मन मोहन सिंह जैसे तथा कथित प्रधान मंत्रियों ने समाप्त कर दिया.यह देश के सामने एक बहुत बड़ा संकट है.देश में ऐसे कई नेता हैं जिन्हें क्षेत्रीय स्तर पर काफी सम्मान प्राप्त है.उदाहरण के तौर पर बंगाल में ममता बनर्जी,ओडिशा में नवीन पटनायक,तमिलनाडु में जय ललिता अथवा के० करूणानिधि,महाराष्ट्र में शरद पवार अथवा बाला साहेब ठाकरे,आंध्र प्रदेश के चंद्रबाबू नायडू,गुजरात में नरेन्द्र मोदी,बिहार में नीतीश कुमार और उत्तर प्रदेश में मायावती अथवा मुलायम सिंह यादव जैसे अत्यंत प्रभावशाली नेता है जिन्हें अपने प्रदेश अथवा क्षेत्र की जनता में मान्यता परत है किन्तु इनमे से किसी नेता को देश का नेता नहीं कहा जा सकता है.

Tuesday, March 20, 2012

बीजेपी को अपनी नीतियों और नेताओं को बदलना होगा

उत्तर प्रदेश के विधान सभा निर्वाचन २०१४ लोक सभा के सामान्य निर्वाचन के पूर्व का सेमी फिनाल था.उसमे बीजेपी काफी पीछे रह गयी,बीजेपी का नेत्रित्व और कार्यकर्त्ता दोनों को परिणाम से बहुत निराशा हाथ लगी,किन्तु केवल परिणाम से हताश होने की आवश्यकता नहीं है,इसके लिए पार्टी के सभी नेता और कार्य करता को बैठ कर गंभीर चिंतन की जरूरत है,पार्टी को देखना होगा की पार्टी किन कारणों से तीसरे स्थान पर खिसक गयी . निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव की अभिसूचना जारी होने के काफी दिनों बाद पार्टी ने अपने प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की,तथा उसके बाद पार्टी द्वारा चुनाव घोषणा पत्र जारी किया गया  .बीजेपी के घोषणा पत्र के पूर्व सपा ने अपना घोषणा पत्र जारी करने के साथ उसका बृहद स्तर पर प्रचार और प्रसार कर दिया था जो युवाओं में काफी लोकप्रिय हो चूका था,ऐसा लगता था बीजेपी ने चुनाव के पूर्व ही अपनी पराजय मान लिया था.यदि आप २००७ के विधान सभा चुनाव से २०१२ के बीच  प्रदेश और देश के स्तर पर अवलोकन करने पर  यह प्रत्यक्ष दिखाई देगा की पार्टी ने अपनी विपक्ष की भूमिका का  सही तरह से निर्वाह नहीं किया  और जन आकान्शाओं और समस्यायों को लाने के लिए उचित  मंच प्रदान नहीं किया.साफ़ तौर पर कहा जा सकता है की पार्टी के पास सक्षम नेत्रित्व का आभाव दिखाई दे रहा है.
   यहाँ मैं यह तथ्य भी उल्लिखित करना चाहूँगा की पार्टी को अपनी नीतियों में भी परिवर्तन करने की आवश्यकता है.बीजेपी ने अपने चुनाव प्रचार में अयोध्या में मंदिर निर्माण के मुद्दे का बिला वजह प्रचार किया जबकि मसला सर्वोच्च न्यायलय के विचाराधीन है.मेरी राय में आगामी २०१४ के लोक सभा के सामान्य निर्वाचन के पहले पार्टी में युवा नेत्रित्व और नयी नीतियों की आवश्यकता पर ठोस कार्यक्रम बनाकर अभी से तयारी शुरू कर देनी चाहिए.
               
              

Monday, October 10, 2011

भारतीय संविधान के अनुसार देश के नागरिक संप्रभु हैं

आज के समाचार पत्र में श्री अरविन्द केजरीवाल का बयान छपा है की भारतीय  संविधान  के  अनुसार  देश  के  नागरिक  संप्रभु  हैं जिसके फलस्वरूप जनता को यह अधिकार है की वह देश के संसद और मंत्रिमंडल के कार्यों पर समुचित कार्यवाही न करने के विषय में पूछ ताछ कर सकती है ,मैं श्री केजरीवाल के कथन का समर्थन करता हूँ.

Friday, April 29, 2011

काला धन : एक सामानांतर अर्थ व्यवस्था

आज़ादी के बाद से ही इस देश की जड़ों को भ्रष्टाचार खोखला कर रहा है .भ्रष्टाचार के कई रूपों में से सबसे ज्यादा भयानक  काला धन (Black Money ) है.यह हमारे देश की अर्थ व्यवस्था के समक्ष चुनौती के रूप में है.वैसे तो देश में देश वासियों द्वारा विदेशी बैंकों में जमा धन की चर्चा कई दशकों से होती रही है परन्तु विगत एक वर्ष से चर्चा ने गंभीर होती गयी.भारतीय जन मानस के दबाव तथा सूचना प्रद्योगिकी में हुए परिवर्तनों के फलस्वरूप Global Village की अवधारणा के चलते हमें देश के बाहर की गतिविधियों की सम्यक जानकारी हो गयी है.जिसके परिणाम स्वरुप एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था "ग्लोबल फैनेशिअल इंटीग्रिटी "के अनुसार भारतीय नागरिकों के लगभग 20 लाख 85 हज़ार करोड़ रुपये विभिन्न विदेशी बैंकों में जमा हैं.काले धन के कारण ही देश में सामानांतर अर्थ व्यवस्था चल रही .इस काले धन पर देश में कोई कर (Tax) प्राप्त नहीं होता है जिसके कारण सरकारों को को प्रकारांतर से अप्रत्यक्ष करों में बढ़ोत्तरी करना पड़ता है जिसके प्रभाव से देश का आम नागरिक बढती महगाई के बोझ तले  दबता जारहा है .
                        विदेशी बैंकों में धन जमा करने वालों में मुख्य रूप से बड़े राज नेता,उद्योगपति और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल  हैं.विदेशी बैंकों में कितना भारतीयों का काला धन इस बात की अधिकारिक जानकारी  स्विस कानूनों की बगैर परवाह किये स्वित्ज़रलैंड के बैंकों में खुले खातों की जानकारी से सम्बंधित सीडी वीकीलिक्स के संस्थापक जुलियन असान्जे को दिया . इस सीडी के अनुसार बैंकों में एशिया, ,इंग्लैंड , और अमेरिका  के नेताओं,उद्योगपतियों के हैं.यहाँ यह बता देना उचित होगा की पीछे लोकसभा चुनाव में विदेशों में जमा कला धन के मुद्दे को एक राजनीतिक दल द्वारा उठाया गया था,तब प्रधान मंत्री द्वारा भी इसका समर्थन किया गया था.साथ ही  प्रचार के दौरान उनके द्वारा देश की जनता से यह वादा भी किया गया था की सत्ता में वापस आने के १०० दिनों उनकी सर्कार द्वारा ठोस कार्यवाही की जाएगी . लेकिन यह देश का दुर्भाग्य है की अब स्वयं प्रधन मंत्री श्री मन मोहन सिंह चुनाव में किये वायदों से भाग रहे हैं.आपको ज्ञात होगा किप्रधान मंत्री डा० मन मोहन सिंह ने पूर्व में जुलाई २००९ राज्य सभा में वित्त विधेयक पर चर्चा के दरमियान बयां दिया कि सरकार विदेशी बैंकों में जमा काले धन की वापसी के लिए कदम उठा चुकी है जो सरकार की अनिच्छा स्पष्ट हो रही है,जो यूपीए सरकार की जनता से किये वादे के विरुद्ध कार्यवाही है.
                   उल्लेखनीय है कि माननीय सर्वोच्च न्यायलय द्वार देश के विधि विज्ञ एवं वरिष्ठ अधिवक्ता श्री राम जेठमलानी के द्वारा दायर विदेशी बैंकों में जमा काले धन पर सुनवाई के दौरान काले धन पर चिंता व्यक्त करने के साथ ही यह टिप्पणी किया था कि विदेशों में जमा काला धन केवल टैक्स चोरी न होकर एक गंभीर अपराध देश की लूट का मामला है.
                         मैं यहाँ पाठकों को यह बटन उचित समझता हूँ कि काले धन का उपयोग आतंकवाद को बढ़ावा देने में भी किया जा रहा है.किन्तु अफ़सोस यह है कि प्रधान मंत्री ने काले धन को देश में लेन कोई प्रयास करने और अब तक प्राप्त जानकारी सार्वजनिक करने में भी असमर्थता व्यक्त किया है. 

Wednesday, July 7, 2010

पेट्रोल और डीजल की केंद्र सरकार द्वारा बढाई गयी कीमतों का औचित्य समझ के बाहर

विगत सप्ताह के पूर्व केन्द्रीय सरकार द्वारा पेट्रोल,डीजल,सी०एन०जी० तथा घरेलू गैस की कीमतों में वृद्धि की गई किन्तु आश्चर्य का विषय है कि वर्तमान में क्रूड आयल का अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में मूल्य ७२ डालर प्रति बैरल है, एक बैरल  १५८.९९ लीटर का होता है,आज डालर के मूल्य के अनुरूप लगभग २१.५० रुपया प्रति लीटर क्रूड आयल है जिसपर लगभग ५.५० से ६ रुपया प्रति लीटर रीफैनिंग के चार्जेस होते है अर्थात कुल मूल्य अधिकतम रुपया २७.५० प्रति लीटर होता है ,जिसपर ७.५ प्रतिशत की दर से कस्टम देय है .किन्तु सरकारों  की मेहरबानी से राज्य में ५४ रुपया से अधिक मूल्य पर पेट्रोल की बिक्री हो रही है,इस तरह से उत्पादन मूल्य से दो गुना से अधिक मूल्य उपभोक्ता से वसूल किया जा रहा है,जिसका औचित्य आम नागरिक की समझ के बाहर है, मैंने उपर्युक्त उदहारण विदेशों से आयातित तेल की गणना की इसमें देश में उत्पादित तेल सम्मिलित नहीं है .ऐसा प्रतीत hota है की वर्तमान   की केन्द्रीय  सरकार  अपने  उद्देश्य  से भटक  गयी  है और  welfare state के रूप  में कार्य  नहीं  कर  रही है.जिसके विरुद्ध जनता और राजनीतिक दलों का दायित्व है की अपनी आवाज़ सरकार के कानों तक पहुचाये. 

Wednesday, June 30, 2010

नक्सली समस्या पर गंभीरता से कार्यवाही अनिवार्य

फिर एकबार छत्तीसगढ़ में नक्सलवादियों ने धरती को लाल कर दिया परंतु अब भी केंद्र सरकार द्वारा जो समस्या के सुधार के लिए जो करने के संकल्प दिखाने का  जो भरोसा दिखाया था,संभवतः अभी उसपर कार्यवाही नहीं की जा सकी अथवा नक्सली सरकार की सोच से ज्यादा आगे हैं जिनके कारण बड़ी संख्या में जान माल की हानि बढती जा रही है. अब पानी सर के ऊपर जा चुका है, आंध्र प्रदेश,छत्तीसगढ़,बिहार,झारखण्ड ,बंगाल के अतिरिक्त नक्सल प्रभाव में उत्तर प्रदेश का दक्षिण अंचल के जिले सोनभद्र,चंदौली ग्रस्त होते जा रहें हैं.अब समय आ गया है कि नक्सलवादियों के ठिकानो को सरकार नष्ट करने के लिए सेना की सहायता लेने में अपनी हिचकिचाहट को दूर कर ठोस कार्यवाही करे.