Wednesday, June 17, 2015

उत्तर प्रदेश में जंगल राज

    उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता की प्रदेश के एक मंत्री के विरुद्ध लिखने के लिये एक स्वतंत्र पत्रकार को शाहजहांपुर जिले की पुलिस ने जिन्दा जलाकर मार डाला गया।यह स्थिति अत्यंत सोचनीय है।इसका तातपर्य यह है की जो सरकार के विरुद्ध लिखने की कोशिश करे उसे जीने का हक नहीं है।क्या लोकतंत्र में अब सरकार के विरोध में बोलने और लिखने की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार प्रदेश सरकार ने समाप्त कर दिया है।

एन0 डी0 टीवी का राष्ट्र विरोधी दृष्टिकोण

    NDTV के प्राइम टाइम पर आज की चर्चा म्यांमार की सीमा पर भारतीय सेना की कार्यवाही विषय था।जिसमे टीवी चैनल के एंकर क्रांति सम्भव थे।चर्चा में NDTV के सीनियर एडिटर प्रियदर्शन,बीजेपी के सम्बित पात्रा,कांग्रेस के अजय कुमार और रि0मेजर जनरल जी0डी0बक्शी सेना विशेषज्ञ के तौर पर थे।चर्चा प्रारम्भ करते हुए क्रांति सम्भव के अनुसार इस कार्यवाही में ऐसा क्या था जिसके लिये सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है।उसके इस कथन से स्पष्ट है भारतीय इलेक्ट्रानिक मीडिया में कई लोगों को यह घटना स्वीकार नहीं है।...चर्चा में कांग्रेस के अजय कुमार को भी भारत सरकार नेतृत्व की सराहना स्वीकार नही।सम्बित पात्रा बहुत शांत तथ्यों की जानकारी दे रहे थे।जनरल बक्शी ने अलबत्ता यह बताया की जो आपरेशन भारतीय सेना ने इस बार किया है वो अभूतपूर्व है जिसमे सेना के आर्मी और एयर फ़ोर्स तथा इंटैलिजेंस का संयुक्त अभियान था जैसा पहले कभी नही हुआ।
    यहां इस चर्चा के उल्लेख करने का तातपर्य यह है की देश की कमिटेड मिडिया और अनेक विपक्षी दलों को देश के गौरव की घटना भी पसन्द नहीं है।सचमुच ये प्रेस्टिटूट की भाति कार्य करती है।
    कृपया विचार करें की क्या इस कार्यवाही को करना राष्ट्र के गौरव को बढ़ाता है?क्या विपक्षी दल को राष्ट्र हित के प्रश्न पर भी अलग राय देना जरूरी है?

कांग्रेस अपने गिरेबाह में पहले देखे


आज कल ईडी के आरोपी ललित मोदी को मदद देने के तथाकथित मामले को लेकर सुषमा स्वराज को कांग्रेस घेरने का प्रयास कर रही है।उल्लेखनीय है की सुषमा जी अपनी पारदर्शी कार्यप्रणाली के लिये जानी जाती रहीं हैं।उन्होंने मानवीय समवेदना के आधार पर मदद किया।ललित को प्रवर्तन निदेशालय फेमा उल्लंघन मामले में तलाश कर रहा था।यह भी ठीक है कि देश के विधान और नियमों के अंतर्गत सहयोग करना आपराधिक श्रेणी में आता है।किन्तु यहां यह बताना अनिवार्य है कि ललित अभी सिर्फ आरोपी हैं उन्हें केवल प्रवर्तन निदेशालय द्वारा नोटिस जारी है जिसके आधार पर उसे आरोपी भी नहीं कहा जा सकता है।किन्तु आप सब को ज्ञात होगा की 1985 में राजीव गांधी ने यूनियन कार्बाइड के एंडरसन जो भोपाल गैस कांड के आरोपी थे,जिनका हाथ हज़ारों बेगुनाहों के खून से रंगा था,को भागने में पूरा सहयोग किया था बाद में कांग्रेस के शासन में बोफोर्स केस के गुनहगार क्वात्रोची को भगाया गया तब कोई प्रधान मंत्री और मंत्री दोषी नही हुआ तो अब सुषमा जी को जिन्होंने मानवीय आधार पर यदि मदद कर दिया तब बतंगड़ बनाना उचित नहीं।किसी घटना पर आलोचना के पहले काग्रेस पार्टी को अपने गिरेबां को देख लेना चाहिए।

Monday, June 8, 2015

बिहार में फिर घृणित गठबंधन



बिहार देश का अत्यंत महत्वपूर्ण राज्य है जो आज़ादी के बाद से देश की गति के साथ कदम मिलाकर नहीं चल रहा था किन्तु दस वर्ष पूर्व भा0ज0पा0 और जदयू के गठबंधन में बनी सरकार ने रा0ज0द0 और उसके पूर्व कांग्रेस पार्टी के अंध भ्र्ष्टाचार से बिहार को मुक्ति दिलाया जो अभी दो वर्ष पूर्व तक चलता रहा किन्तु जदयू के नेतृत्व को यकायक बीजेपी का नेतृत्व नरेंद्र मोदी को मिलने से ऐतराज होने के आधार बिहार की जनता के लिये किये जा रहे गुड वर्क को समाप्त करने का उनका निर्णय प्रदेश की जनता से किया जाने वाला बहुत बड़ा धोखा था।जिसके बाद जदयू ने उन्ही राजनितिक दलों जिनके विरुद्ध उन्होंने चुनाव लड़कर बहुमत प्राप्त किया था उन्हीं का समर्थन लेकर अपनी सरकार बचाया गया।जो एक घोर अपवित्र गठबंधन है।इन अंतिम दो वर्षों में बिहार को वर्तमान सरकार ने अराजकता,भ्र्ष्टाचार के दलदल में लाकर पुनः खड़ा कर दिया।जो नितीश कुमार लालू यादव और उनके परिवार के भ्र्ष्टाचार के बारे में कहते नही थकते नहीं थे वो आज उन्ही की तारीफ में कशीदे पढ़ रहे हैं।
आज देश एक सार्थक बदलाव और सुशासन की दिशा में कदम बढ़ा रहा है उसमे बिहार की जनता पर एक बड़ी भारी जिम्मेदारी है की वो इन वोट के लुटरों और सत्ता के भूखी पार्टियों के भ्रामक छलावे में न आये और देश के विकास और सुशासन के लिये उचित निर्णय ले।

आखिर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को प्रधान मंत्री के मुस्लिम उलेमाओं से मिलने पर आपत्ति क्या

पी एम् नरेंद्र मोदी द्वारा विगत दिन देश में साम्प्रदायिक सौहार्द बनाने के लिये मुसलमान उलेमाओं से मिलने को आमन्त्रित किया जिसमे बड़ी संख्या में मस्जिदों के इमाम और अन्य धर्म गुरु उनसे मिले।इस घटना से सभी टीवी चैनल ndtv,आजतक और ए बी पी न्यूज़ के दिलों में अचानक दर्द उठने लगा की कहीं नरेंद्र मोदी के पक्ष में मुसलमान न होजाये।इसलिये तुरत ही इन चैनलों पर गोष्ठी प्रारम्भ हो गया की कैसे मोदी जी की इस मुहीम की हवा निकाल दी जाय।उनकी इस मुहीम में उनके साथ एक इतिहासकार इरफ़ान हबीब जैसे वामपंथी,ओवैसी और मुलायम वादी इस्लामी नेताओं ने मोदी जी की नियत पर शक कर देश के मुसलमानो को गुमराह करने का प्रयास करना शुरू कर दिया।इन गोष्ठियों में इन चैनलों के एंकर का योगदान भी मुलायमवादी और वामपंथी तथा ओवैसी को भरपूर दिया जा रहा था।वार्ता में ओवैसी और चैनल पर आमन्त्रित वक्ताओं ने उलेमाओं को मुसलमान सम्पर्दाय का प्रतिनिधि न होने की बात कहा जो सर्वथा अनुचित है।सल्तनत काल और मुग़ल साम्राज्य के शासन काल में सुल्तानों और बादशाहों ने उलेमाओं को ही इस्लाम का प्रतिनधि माना और उनकी सलाह पर ही निर्णय लिये जाते रहे।कुछ सुल्तानों के शासन को इतिहासकारों ने उलेमाओं का शासन कहा गया।किन्तु अब ये वार्ताकार और चैनल के एंकर इसके विपरीत उन्हें मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधि मानने के तैयार नहीं हैं।
ऐसी हालत में देश के सामान्य अल्पसंख्यक मुसलमानों को इन चैनलों और राष्ट्र द्रोही नेताओं से सावधान रहने की जरूरत है।

Saturday, June 6, 2015

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कमिटेड ऐंकर

इस समय इलेक्ट्रानिक मीडिया जिनमे ए0बी0पी0 न्यूज़,एन0डी0टीवी,आजतकऔर न्यूज़ 24 ऐसे प्रमुख न्यूज़ चैनल हैं जिनके न्यूज़ एडिटर्स ऐसे लोगों को रखा गया है जो सभी दिल्ली के प्रमुख विश्व विद्यालय में अध्ययन किये हुए हैं जो भारत में वामपंथी विचार धारा का प्रसार करने के लिये प्रसिद्ध है।इन ऐंकर्स में ए0बी0पी0 न्यूज़ के विजय विद्रोही,अभिसार शर्मा एन0डी0टीवी के अभिज्ञान प्रकाश,रवीश कुमार,निधि कुलपतिऔर बरखा दत्त तथा आजतक के राजदीप सरदेसाई,पुण्य प्रसून वाजपेयी,अंजना ओम कश्यपऔर अशोक सिंघल आदि और न्यूज़ 24 जिसकी स्वमिनि अनुराधा प्रसाद जो राजीव शुक्ल,कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सदस्य की पत्नी हैं। इन सभी चैनलों के उपर्युक्त ऐंकरों के द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रमों में इनके द्वारा हमेशा देश हित से इतर इनकी अपनी विचारधारा के अनुरूप तथ्य थोपा जाता है।इनके द्वारा स्वयम को लोकतान्त्रिक प्रदर्शित करने का प्रयास किया जाता है किन्तु यथार्थ इसके विपरीत होता है।इनके लिये आम जन भावना कोई स्थान नहीं रखता।ये लोग विगत दस वर्षों से सत्ताधारी दल के प्रचारक के तौर पर देश की जनता को भर्मित करते रहें हैं।इनका और पूर्व सत्ताधारी दल से लाभ का भी रिश्ता रहा है।यदि इस तथ्य की वास्तविक स्थिति जानने के लिये इनकी टीवी चैनल पर कार्य किये जाने के पूर्व आर्थिक स्थिति और आज की स्थिति का आकलन करने पर ज्ञात होगा कि ये सभी काफी धनाढ्य हो चुके हैं।आज के सत्ताधारी दल को नीचा दिखाने का भरपूर प्रयास किया जाता है।इनका जोर चला होता तो बीजेपी देश की सत्ता में न आ पाई होती।किन्तु अब देश की जनता को इनकी सच्चाई का ज्ञान हो चूका है।साथ ही साँच को आंच नहीं होती इसीलिये बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मानव सन्साधन मंत्री द्वारा इनको सार्वजनिक रूप से बेनकाब कर दिया।
ये मीडिया देश में विष वमन का कार्य कर रहा है जिससे जनता को सतर्क रहने की आवश्यकता है।

Monday, June 1, 2015

टी0वी0 चैनलों का भ्रामक प्रचार

आज टीवी चैनलों एक समाचार चल रहा है कि मुम्बई में एक मुस्लिम महिला को सांघवी हाइट्स के सुपरवाइजर द्वारा मकान किराये पर देने से मना करने का आरोप लगाते दिखाया जा रहा है।साथ ही इस समाचार पर प्रदेश और केंद्र सरकार के विरुद्ध राजनीति भी शुरू हो गया है।इसके पहले एक मुस्लिम युवक द्वारा किसी कम्पनी पर मुस्लिम होने के कारण नौकरी पर न रखने का आरोप लगाया था। ये दोनों
मसला एक गम्भीर मामला है।जो सम्विधान के समानता के अधिकार के विरुद्ध है।किन्तु यदि इस विषय पर गम्भीरता से विचार करे तो हम पाएंगे की जब सम्विधान के अंतर्गत समान नागरिक संहिता नही है तब किस तरह से किसी अन्य संप्रदाय के व्यक्ति को उसकी व्यक्तिगत कम्पनी अथवा प्रॉपर्टी के लिये सेवा में रखने अथवा किराये पर रखने के अधिकार को कैसे चुनौती दिया जा सकता है।इस के समर्थन में मैं एक उदाहरण मेसर्स हमदर्द इंडिया का देना चाहूँगा जो एक मुस्लिम ट्रस्ट द्वारा संचालित कम्पनी है जो दिल्ली में स्थित है तथा इसकी एक शाखा पाकिस्तान में भी है।इस कम्पनी में केवल मुस्लिम कर्मचारी एवं अधिकारी काम करते हैं जो संयोग वश नहीं अपितु अनिवार्य रूप से है।इसी तरह अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का वी0सी0 केवल मुस्लिम हो सकता है।इसी तरह देश भर में बहुत से ऐसी शिक्षण संस्थाएं है जिनको सरकार द्वारा अल्पसंख्यक घोषित किया गया है जिसमे प्रवेश का आधार योग्यता न होकर अल्प सन्ख्यक समुदाय का होना काफी होता है।ये सारी संस्थाएं सम्विधान के अंतर्गत हैं।
उपर्युक्त परिस्थितियों में मुम्बई की घटना पर कैसे रोक लगाई जाय यह विचारणीय होगा।हाँ इस सन्दर्भ में छः सात वर्ष पूर्व सिने अभिनेता इमरान हाश्मी का बयान स्मरण है जिन्होंने मुम्बई के बिल्र्डर्स पर उन्हें अल्पसंख्यक समुदाय का होने के कारण भवन बेचने से मना करने का आरोप लगाया था।इससे स्पष्ट है कि इस प्रकार की घटना कांग्रेस शासित महाराष्ट्र राज्य में भी था तब क्यों उस बिल्डर पर कार्यवाही नही किया गया।तब शहज़ाद पूनावाला कहाँ थे।
इसी तरह आज़ादी के बाद से अबतक कांग्रेस की सरकार थी तब समान नागरिक संघिता क्यों लागू नही किया गया।क्या यह एकांगी चिंतन नही है?ये तो वही बात हुई मैं करू तो....कैरेक्टर .....।

कांग्रेस कब तक झूठ बोलेगी

आजकल कांग्रेस पार्टी के बड़े छोटे नेताओं ने झूठ बोलने की आपसी प्रतिस्पर्धा शुरू कर दिया है।इस प्रतिस्पर्धा में शालीनता और मूल्यों को तिलांजलि दे दिया है।आश्चर्य तो इस बात का है की जिस पार्टी ने आज़ादी के पहले से सत्ता सुख का आनन्द ले रही थी।जिसकी तीन पीढियां 55 वर्ष तक सत्ता का भोग करती रही।किन्तु एक वर्ष पूर्व हुए आम निर्वाचन में 50 का आंकड़ा भी न पार करने का इतना बड़ा सदमा लगा है की सबने मानसिक सन्तुलन पूरी तरह खो दिया है।यह सन्तुलन इतना बिगड़ गया है की सत्य के बारे में भी अनर्गल प्रलाप किया जा रहा है।1947 से 2014 तक जितनी किसानों की जमीन की लूट इन्ही कांग्रेसियों ने किया।धीरूभाई अम्बानी की हैसियत इन्ही के कार्यकाल में बढ़ी।मोदी जी के भूमि अधिग्रहण बिल में पहली बार भूमि अधिग्रहण केवल और सिर्फ केंद्र एवं राज्य सरकारों की विकास परियोजना के क्रियान्वयन के लिये किया जाने की व्यवस्था है परन्तु इनकी पार्टी के अभूतपूर्व ज्ञानी नेता को बार बार यह स्वप्न दिखाई देता है जैसे इनके दस वर्षों के शासन में हरियाणा,राजस्थान और हिमाचल में इनके बहनोई को कौड़ियों के मोल जमीन आंवटित कर दिया गया उसी तरह इन्हें दुः स्वप्न आता रहता है।
मई 2014 के बाद इनकी जबान पर ताले लग गए थे।किन्तु 56 दिनों के विदेश प्रवास में में इन्होंने कुछ ऐसा ज्ञान प्राप्त किया कि ये तो बदजबां हो गए।बद्तमीज तो यर पहले से ही थे जो अपनी ही सरकार के एक विधेयक की प्रति लोक सभा में फाड़ चुके हैं।तमीज़ की उम्मीद तो इनसे कतई नहीं की जा सकती किन्तु कम से कम झूठ बोलने से तो तौबा करें।

Thursday, May 21, 2015

उ0प्र0 में पानी और बिजली का घोर संकट

अप्रैल माह में बेमौसम बरसात के कारण बिजली संकट होने के बाद भी भीषण गर्मी की अनुभूति नही हुई।किन्तु मई के आरम्भ से ही बिजली और पानी का घोर संकट प्रारम्भ हो गया।हालात इतने खराब हो चुके हैं कि प्रदेश की राजधानी के अधिकांश भागों में बिजली का संकट है।साथ ही लखनऊ की जनता बूँद बूँद पानी के लिये तरस रही है।राजधानी की दशा देखने के बाद प्रदेश के अन्य जिलों में बिजली पानी के अति भयंकर स्थिति का आकलन किया जा सकता है।शायद ये समस्या मैनपूरी,कन्नौज,एटा...,इटावा आदि में सम्भवतः यह स्थिति न हो क्यों की ये जिले सत्ताधारी दल के लिये राजधानी से बेहतर स्थिति में हैं।यहां यह बात ज्यादा महत्वपूर्ण बात हसि कि समाचार पत्रों के अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनिक मीडिया टीवी के किसी चैनल ने देश के सबसे बड़े राज्य की इस दुर्दशा का उल्लेख तक नहीं किया।प्रदेश का आम नागरिक के लिये हर गर्मी के मौसम में यही दशा होती है।किन्तु इस वर्ष तो सरकार ने स्वयम् घोषणा क्र दिया था उनके सभी चुनावी वादे पुरे किये जा चुके हैं।तो इससे यह समझ में आता है उसकी नज़र में पानी बिजली का संकट कोई मायने नहीं रखता।

Tuesday, May 19, 2015

स्वतंत्रता के बाद देश के इतिहास का पुनर्लेखन अनिवार्य था

आज देश के युवकों और विद्यार्थियों के समक्ष के नई प्रकार की समस्या आरही है।आज क्या मेरे युवा कल में भी इसी प्रकार की समस्या हम लोगों के समक्ष थी।इस बात को मैं एक उदाहरण से बताना चाहता हूँ कि बचपन से यह पढ़ाया गया की मुगल शासक अकबर महान था।उसी के साथ साथ महाराणा प्रताप की गौरव गाथा भी पढ़ाया गया।हल्दी घाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप की शूर वीरता का उल्लेख बताया गया।चुकी महाराणा प्रताप ने हल्दी घाटी युद्ध अकबर महान की सेना की विरुद्ध लड़ा था।इसलिये प्रश्न यह उठता है की दोनों चीजे एक दूसरे के विपरीत हैं।अकबर को महान बनाने के पीछे तर्क है की समुद्रगुप्त के बाद किसी भी एक बादशाह के नियंत्रण में भारत का उतना बड़ा भू भाग नहीं था जितना अकबर के नियंत्रण में। था।एक प्रकार से एक केंद्रीय शासन में देश था।अन्य कारणों में उसका अन्य मुसलमान शासकों की तुलना में उलेमा और मौलवियों को किनारे कर रखा था,साथ ही उसने हिंदुओं को जजिया से मुक्त कर रखा था।धार्मिक सहिष्णुता की नीति उसने अपनाया था।उसके दरबार में हिन्दू राजाओं को भी बराबर की मनसब देकर मनसबदार बनाया।तथा कथित राजा भारमल की कन्या से उसने विवाह कर राजपूत राजाओं का भरोसा जीतने का यत्न किया।इस तरह उसे महान कहा गया।किन्तु वहीं महाराणा प्रताप और हल्दी घाटी के युद्ध को प्रथम स्वतंत्रता युद्ध का दर्ज़ा दिया गया।मुझे स्मरण है आपातकाल के दौरान प्रधान मंत्री इदिरा गांधी ने हल्दी घाटी के युद्ध की 400वीं वर्षगांठ को बहुत धूम से मनाया था।जिससे यह तथ भी बिरोधाभास पैदा करता है की अकबर के बारे में जो सोच है वः सही नहीं है।अकबर के काल का इतिहास हमे उनके दरबारी लेखकों और आईने अकबरी जैसी किताब के आधार पर आरम्भिक रूप से पाया जाता है।बाद में अंग्रेजों के शासन कॉल में लिखा इतिहास एक खास इरादे के तहत लिखा गया था।उनका मकसद लार्ड मैकाले के बताये निर्देशों के अनुरूप शासित हिन्दुस्तानियों गुलाम बनाये रखने के दृष्टीकोण से उनके इतिहास को घटिया बताने के लिये लिखा गया।हाँ कुछ एक इतिहासकार जैसे कर्नल टाड ने काफी कुछ शोध कर राजपूतों का इतिहास लिखा गया जिसमे आंशिक रूप से सत्यता पायी जाती है।इसलिये सही मायनों में सत्य और वास्तविकता से देश की पीढ़ी को अवगत कराने की दृष्टी से इतिहास का पनरलेखन होना चाहिए।आज़ादी के बाद इतिहास को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत करने का काम वामपंथी विचार धारा के इतिहासकारों ने किया।जिन्हें राष्ट्रीयता के विपरीत पाश्चात्य चिंतन का ज्यादा महत्व रहा है।इन लोगों के कुकृत्यों को भी उजागर करना होगा।

Monday, May 18, 2015

भारत और चीन सम्बन्धों की आवश्यकता

भारत आज जिस विकास की प्रक्रिया से गुज़र रहा है उसके लिये चीन से सम्बन्ध दृढ करना समय की मांग है।भारत और चीन एक दूसरे से हजारों वर्षों से बौद्धिक और व्यापारिक आधार पर जुड़े रहें हैं।भारत से अनेक विद्वान् और काबिल लोग चीन गए जिनमे आज़ादी के पहले डा0द्वारका नाथ कोटनिस का उल्लेख करना उचित होगा जिन्होंने चीन में रहकर चीन वासियों को अनेक महामारी से बचाने का प्रयास किया उसी तरह चीन से फाह्यान,ह्वेनसांग सहित अनेक यात्री भारत आये तथा बौद्ध धर्म की शिक्षा ग्रहण किया।
1947 में भारत स्वतन्त्र हुआ वहीं चीन एक नए रूप में 1949 में आया जब जनवादी क्रांति के बाद माओत्से तुंग ने बाग डोर सम्भाली।50 के दशक में भारत और चीन के सम्बन्ध अपने मधुरतम दौर में थे।दोनों देशों के अनेक नेताओं ने एक दूसरे के देश की यात्रा किया।1954 में भारत ने बौद्ध धर्म के पांच सिद्धांतों के आधार पर विदेश निति के पंचशील के सिद्धांत की घोषणा किया।जिसे 25 जून 1954 को चीनी प्रधान मंत्री चाउ एन लाई ने भारत यात्रा के समय स्वीकार किया।किन्तु उसी समय चीनी ख़ुफ़िया एजेंसी से भारत की सामरिक तैयारी की जानकारी उन्हें मिल गई थी।साथ ही हमारे तत्कालीन प्रधान मंत्री को शांति का कबूतर उड़ाने के शौक और नोबल शांति पुरस्कार पाने की लालसा ने राष्ट्रीय सुरक्षा की अवहेलना करते हुए चीन द्वारा तिब्बत को कब्ज़े में लेने का विरोध नहीं किया।जिसके परिणाम स्वरूप हमारी सीमा चीन से जुड़ गई।इधर हम लोग हिंदी चीनी भाई भाई के नारों में अभिभूत थे।उसका लाभ उठा कर चीन ने 1962 की सर्दियों में लद्दाख और उत्तर पूर्व की सीमा पर आक्रमण कर बहुत बड़ा भारतीय क्षेत्र अपने कब्ज़े में ले लिया।उसके बाद से चीन ने हमारे पड़ोसी शत्रु देश से घनिष्ठ मित्रता करली।साम्यवादी चीन अपने कठोर अनुशासन की बदौलत आज एक आर्थिक शक्ति बन गया।राजीव गांधी के प्रधान मंत्रित्व काल में तथा बाद में अटल जी के काल में चीन से सम्बन्ध सुधारने की आवश्यकता महसूस की गई।आज भारत चीन के मध्य बड़े पैमाने पर व्यापार होता है।अब यह सत्य है की चीन को भी भारत से अच्छे सम्बन्ध बढ़ाने की आवश्यकता है।इसलिए पाकिस्तान से अधिक निकटता होंने के बाद भी उनको भारत के महत्व पता है।प्रधान मंत्री मोदी ने चीनी राष्ट्रपति से एक अच्छा मैत्री पूर्ण सम्बन्ध स्थापित करने की जरूरत के आधार पर सत्ता में आने के बाद से ही इस दिशा में प्रयत्न करना शुरू कर अब वे स्वयं चीन यात्रा पर हैं।इस यात्रा से तत्काल पचास वर्ष पूर्व हुई कूटनीतिक त्रुटि यकायक सुधर जाने की सम्भावना तो नही है।किंतु सुधार की दिशा में एक सार्थक कदम जरूर उठाया जा सकता है।

प्रधान मंत्री मोदी की चीन यात्रा

प्रधान मंत्री मोदी चीन यात्रा पर हैं,वो दोनों देशों के मध्य सहयोग बढ़ाने का प्रयत्न कर रहें हैं जिसका प्रारम्भ उनके पहले राजीव गांधी,अटल बिहारी वाजपेयी और डा0मनमोहन सिंह ने भी किया जो राष्ट्रीय विकास और सुरक्षा के लिये अनिवार्य है क्यों कि चीन एशिया महाद्वीप की सबसे बड़ी शक्ति है।जिसने आर्थिक विकास के पूर्व अपनी सामरिक क्षमता बढ़ाने और परमाणु शक्ति अर्जित करने के बाद किया।सामरिक क्षमता बढ़ाने के बाद ही आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त होता है।अटल जी के शासन काल में भारत भी परमाणु शक्ति सम्पन्न देश हो चूका है।विगत वर्षों में भारत ने अन्तर महाद्वीप बैलिस्टिक मिसाइल के क्षेत्र में भी वांछित प्रगति हासिल करने में सफल रहा है।ऐसे में आर्थिक विकास करने के लिये हमे चीन का अनुकरण करना चाहिये।चीन ने 30 वर्ष पहले शहरीकरण की प्रक्रिया शुरू किया था।आज उनके शहर दुनिया में अपनी पहचान बनाने में सफल हुए हैं।चीन के विकास की गति भारत के लिये अनुकरणीय है।यदि हमलोग पुरानी बातों पर ही रुके रहे तो हम उनसे प्रतियोगिता नहीं कर पाएंगे।इसलिये वो लोग आज भी 62 के चीनी आक्रमण से आहत हैं उनसे मेरा कहना है कि चीन से पराजय के दोषी हमारा तात्कालिक नेतृत्व जिम्मेदार था।सोचिये यदि चीन ने आक्रमण न किया होता तो हम 1965 में पाकिस्तान से युद्ध न जीत पाये होते।आप सब की जानकारी के लिये बताऊ की भारत 1947 में आज़ाद हुआ उसी तरह 1949 में नवीन चीन अस्तित्व में आया।देखते देखते उसने अपनी सामरिक और आर्थिक सम्पन्नता हासिल करने में सफल हुआ।1962 की पराजय में भारत के बड़े भू भाग को युद्ध से नही जीत जा सकता।होशियारी और नीति यही कहती है कि धैर्य से चीन के साथ सम्बन्धों को सुधारते हुए विकास हेतु सहयोग लेना होगा।

वर्तमान लोकसभा में विपक्ष देश की प्रगति में बाधक

वर्तमान लोकसभा में विपक्ष देश की प्रगति में बाधक:-
1952 में पहली लोकसभा के बाद से अबतक 2014 के वर्तमान लोकसभा के इतिहास का पनरावलोकन करने पर हम पाते हैं कि वर्तमान लोकसभा के पूर्व तक की लोकसभा में विपक्ष के नेताओं में आचार्य कृपलानी,डा0राम मनोहर लोहिया,आचार्य नरेंद्र देव,श्रीपाद अमृत डांगे,अटल बिहारी वाजपेयी,मधु लिमये,लाल कृष्ण अडवाणी जैसे गम्भीर नेता थे।जिन्होंने देश की संसद पर अपनी योग्यता और विद्वत्ता की छाप छोड़ी।किन्तु आज जिस प्रकार का नेतृत्व विपक्ष में बैठा है उसकी योग्यता के विषय में कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है परन्तु उसके साथ जिस भाषा का प्रयोग किया जा रहा है वह आपत्तिजनक भी है।आज विपक्ष में कांग्रेस पार्टी के राहुल गांधी,मल्लिकार्जुन खड़गे,सोनिया गांधी और सपा के नेता मुलायम सिंह यादव हैं इनमे से कोई भी ऐसा नेता नहीं जो पुरानी नेताओं के इर्द गिर्द भी नही है।जिसके कारण सत्ता पक्ष के ऊपर एक अतिरिक्त दायित्व है।विपक्ष हताशा से बाहर न आकर अनर्गल तरीके से विकास की गति को बाधित कर रहा है।जो जनहित में नहीं है।

Thursday, March 22, 2012

केंद्र की कांग्रेस नीत सरकार को सपा एवं बसपा का समर्थन क्या उनकी दोगली नीति नहीं ?

अभी पिछले माह में उत्तर  प्रदेश के निर्वाचन हुए थे जिनमे कांग्रेस,सपा और बसपा सबने एक दुसरे के विरुद्ध चुनाव लड़ा और आरोप प्रत्यारोप का का सिलसिला खूब चला किन्तु चुनाव समाप्त होते ही सपा और बसपा ने केंद्र की कांग्रेस नीत सरकार को संसद में समर्थन देना आरम्भ कर प्रदेश की जनता को धोखा देने का काम शुरू कर दिया,अभी आज संसद के दोनों सदनों में विपक्ष द्वारा 10.7  लाख करोड़ कोयला घोटाले के CAG की ड्राफ्ट रिपोर्ट पर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गाँधी सपा नेता से संसद में सरकार को समर्थन देने की अपील की है.
इससे बड़े दोमुहेपन का और कोई उदाहरण और देखने की मिसाल सामने है.मेरी आम जनता से अपील है की क्या इसका जवाब वह इन सभी पार्टियों से नहीं चाहती ?  
              

Wednesday, March 21, 2012

देश का नेता कोई नहीं

वर्तमान में देश में राष्ट्रीय स्तर का किसी भी राष्ट्रीय राजनितिक पार्टियों में एक भी नेता नहीं जो पूरे देश में सामान रूप से सम्मानित हो.ऐसा लगता है की जवाहर लाल नेहरु ,नेता जी सुभाष चन्द्र बोस,लाल बहादुर शास्त्री ,इंदिरा गाँधी,मोरार जी भाई ,राजीव गाँधी तथा अटल बिहारी बाजपाई के बाद कोई नेता ऐसा नहीं है जिसे सम्पूर्ण देश में एक सामान नेता स्वीकार किया गया हो. सामान्य रूप से यह मान्यता रही है की प्रधान मंत्री देश का नेता हुआ करता था.किन्तु इस परम्परा को चरण सिंह,चन्द्रशेखर, बी पी सिंह,देव गौड़ा और मन मोहन सिंह जैसे तथा कथित प्रधान मंत्रियों ने समाप्त कर दिया.यह देश के सामने एक बहुत बड़ा संकट है.देश में ऐसे कई नेता हैं जिन्हें क्षेत्रीय स्तर पर काफी सम्मान प्राप्त है.उदाहरण के तौर पर बंगाल में ममता बनर्जी,ओडिशा में नवीन पटनायक,तमिलनाडु में जय ललिता अथवा के० करूणानिधि,महाराष्ट्र में शरद पवार अथवा बाला साहेब ठाकरे,आंध्र प्रदेश के चंद्रबाबू नायडू,गुजरात में नरेन्द्र मोदी,बिहार में नीतीश कुमार और उत्तर प्रदेश में मायावती अथवा मुलायम सिंह यादव जैसे अत्यंत प्रभावशाली नेता है जिन्हें अपने प्रदेश अथवा क्षेत्र की जनता में मान्यता परत है किन्तु इनमे से किसी नेता को देश का नेता नहीं कहा जा सकता है.

Tuesday, March 20, 2012

बीजेपी को अपनी नीतियों और नेताओं को बदलना होगा

उत्तर प्रदेश के विधान सभा निर्वाचन २०१४ लोक सभा के सामान्य निर्वाचन के पूर्व का सेमी फिनाल था.उसमे बीजेपी काफी पीछे रह गयी,बीजेपी का नेत्रित्व और कार्यकर्त्ता दोनों को परिणाम से बहुत निराशा हाथ लगी,किन्तु केवल परिणाम से हताश होने की आवश्यकता नहीं है,इसके लिए पार्टी के सभी नेता और कार्य करता को बैठ कर गंभीर चिंतन की जरूरत है,पार्टी को देखना होगा की पार्टी किन कारणों से तीसरे स्थान पर खिसक गयी . निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव की अभिसूचना जारी होने के काफी दिनों बाद पार्टी ने अपने प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की,तथा उसके बाद पार्टी द्वारा चुनाव घोषणा पत्र जारी किया गया  .बीजेपी के घोषणा पत्र के पूर्व सपा ने अपना घोषणा पत्र जारी करने के साथ उसका बृहद स्तर पर प्रचार और प्रसार कर दिया था जो युवाओं में काफी लोकप्रिय हो चूका था,ऐसा लगता था बीजेपी ने चुनाव के पूर्व ही अपनी पराजय मान लिया था.यदि आप २००७ के विधान सभा चुनाव से २०१२ के बीच  प्रदेश और देश के स्तर पर अवलोकन करने पर  यह प्रत्यक्ष दिखाई देगा की पार्टी ने अपनी विपक्ष की भूमिका का  सही तरह से निर्वाह नहीं किया  और जन आकान्शाओं और समस्यायों को लाने के लिए उचित  मंच प्रदान नहीं किया.साफ़ तौर पर कहा जा सकता है की पार्टी के पास सक्षम नेत्रित्व का आभाव दिखाई दे रहा है.
   यहाँ मैं यह तथ्य भी उल्लिखित करना चाहूँगा की पार्टी को अपनी नीतियों में भी परिवर्तन करने की आवश्यकता है.बीजेपी ने अपने चुनाव प्रचार में अयोध्या में मंदिर निर्माण के मुद्दे का बिला वजह प्रचार किया जबकि मसला सर्वोच्च न्यायलय के विचाराधीन है.मेरी राय में आगामी २०१४ के लोक सभा के सामान्य निर्वाचन के पहले पार्टी में युवा नेत्रित्व और नयी नीतियों की आवश्यकता पर ठोस कार्यक्रम बनाकर अभी से तयारी शुरू कर देनी चाहिए.
               
              

Monday, October 10, 2011

भारतीय संविधान के अनुसार देश के नागरिक संप्रभु हैं

आज के समाचार पत्र में श्री अरविन्द केजरीवाल का बयान छपा है की भारतीय  संविधान  के  अनुसार  देश  के  नागरिक  संप्रभु  हैं जिसके फलस्वरूप जनता को यह अधिकार है की वह देश के संसद और मंत्रिमंडल के कार्यों पर समुचित कार्यवाही न करने के विषय में पूछ ताछ कर सकती है ,मैं श्री केजरीवाल के कथन का समर्थन करता हूँ.

Friday, April 29, 2011

काला धन : एक सामानांतर अर्थ व्यवस्था

आज़ादी के बाद से ही इस देश की जड़ों को भ्रष्टाचार खोखला कर रहा है .भ्रष्टाचार के कई रूपों में से सबसे ज्यादा भयानक  काला धन (Black Money ) है.यह हमारे देश की अर्थ व्यवस्था के समक्ष चुनौती के रूप में है.वैसे तो देश में देश वासियों द्वारा विदेशी बैंकों में जमा धन की चर्चा कई दशकों से होती रही है परन्तु विगत एक वर्ष से चर्चा ने गंभीर होती गयी.भारतीय जन मानस के दबाव तथा सूचना प्रद्योगिकी में हुए परिवर्तनों के फलस्वरूप Global Village की अवधारणा के चलते हमें देश के बाहर की गतिविधियों की सम्यक जानकारी हो गयी है.जिसके परिणाम स्वरुप एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था "ग्लोबल फैनेशिअल इंटीग्रिटी "के अनुसार भारतीय नागरिकों के लगभग 20 लाख 85 हज़ार करोड़ रुपये विभिन्न विदेशी बैंकों में जमा हैं.काले धन के कारण ही देश में सामानांतर अर्थ व्यवस्था चल रही .इस काले धन पर देश में कोई कर (Tax) प्राप्त नहीं होता है जिसके कारण सरकारों को को प्रकारांतर से अप्रत्यक्ष करों में बढ़ोत्तरी करना पड़ता है जिसके प्रभाव से देश का आम नागरिक बढती महगाई के बोझ तले  दबता जारहा है .
                        विदेशी बैंकों में धन जमा करने वालों में मुख्य रूप से बड़े राज नेता,उद्योगपति और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल  हैं.विदेशी बैंकों में कितना भारतीयों का काला धन इस बात की अधिकारिक जानकारी  स्विस कानूनों की बगैर परवाह किये स्वित्ज़रलैंड के बैंकों में खुले खातों की जानकारी से सम्बंधित सीडी वीकीलिक्स के संस्थापक जुलियन असान्जे को दिया . इस सीडी के अनुसार बैंकों में एशिया, ,इंग्लैंड , और अमेरिका  के नेताओं,उद्योगपतियों के हैं.यहाँ यह बता देना उचित होगा की पीछे लोकसभा चुनाव में विदेशों में जमा कला धन के मुद्दे को एक राजनीतिक दल द्वारा उठाया गया था,तब प्रधान मंत्री द्वारा भी इसका समर्थन किया गया था.साथ ही  प्रचार के दौरान उनके द्वारा देश की जनता से यह वादा भी किया गया था की सत्ता में वापस आने के १०० दिनों उनकी सर्कार द्वारा ठोस कार्यवाही की जाएगी . लेकिन यह देश का दुर्भाग्य है की अब स्वयं प्रधन मंत्री श्री मन मोहन सिंह चुनाव में किये वायदों से भाग रहे हैं.आपको ज्ञात होगा किप्रधान मंत्री डा० मन मोहन सिंह ने पूर्व में जुलाई २००९ राज्य सभा में वित्त विधेयक पर चर्चा के दरमियान बयां दिया कि सरकार विदेशी बैंकों में जमा काले धन की वापसी के लिए कदम उठा चुकी है जो सरकार की अनिच्छा स्पष्ट हो रही है,जो यूपीए सरकार की जनता से किये वादे के विरुद्ध कार्यवाही है.
                   उल्लेखनीय है कि माननीय सर्वोच्च न्यायलय द्वार देश के विधि विज्ञ एवं वरिष्ठ अधिवक्ता श्री राम जेठमलानी के द्वारा दायर विदेशी बैंकों में जमा काले धन पर सुनवाई के दौरान काले धन पर चिंता व्यक्त करने के साथ ही यह टिप्पणी किया था कि विदेशों में जमा काला धन केवल टैक्स चोरी न होकर एक गंभीर अपराध देश की लूट का मामला है.
                         मैं यहाँ पाठकों को यह बटन उचित समझता हूँ कि काले धन का उपयोग आतंकवाद को बढ़ावा देने में भी किया जा रहा है.किन्तु अफ़सोस यह है कि प्रधान मंत्री ने काले धन को देश में लेन कोई प्रयास करने और अब तक प्राप्त जानकारी सार्वजनिक करने में भी असमर्थता व्यक्त किया है. 

Wednesday, July 7, 2010

पेट्रोल और डीजल की केंद्र सरकार द्वारा बढाई गयी कीमतों का औचित्य समझ के बाहर

विगत सप्ताह के पूर्व केन्द्रीय सरकार द्वारा पेट्रोल,डीजल,सी०एन०जी० तथा घरेलू गैस की कीमतों में वृद्धि की गई किन्तु आश्चर्य का विषय है कि वर्तमान में क्रूड आयल का अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में मूल्य ७२ डालर प्रति बैरल है, एक बैरल  १५८.९९ लीटर का होता है,आज डालर के मूल्य के अनुरूप लगभग २१.५० रुपया प्रति लीटर क्रूड आयल है जिसपर लगभग ५.५० से ६ रुपया प्रति लीटर रीफैनिंग के चार्जेस होते है अर्थात कुल मूल्य अधिकतम रुपया २७.५० प्रति लीटर होता है ,जिसपर ७.५ प्रतिशत की दर से कस्टम देय है .किन्तु सरकारों  की मेहरबानी से राज्य में ५४ रुपया से अधिक मूल्य पर पेट्रोल की बिक्री हो रही है,इस तरह से उत्पादन मूल्य से दो गुना से अधिक मूल्य उपभोक्ता से वसूल किया जा रहा है,जिसका औचित्य आम नागरिक की समझ के बाहर है, मैंने उपर्युक्त उदहारण विदेशों से आयातित तेल की गणना की इसमें देश में उत्पादित तेल सम्मिलित नहीं है .ऐसा प्रतीत hota है की वर्तमान   की केन्द्रीय  सरकार  अपने  उद्देश्य  से भटक  गयी  है और  welfare state के रूप  में कार्य  नहीं  कर  रही है.जिसके विरुद्ध जनता और राजनीतिक दलों का दायित्व है की अपनी आवाज़ सरकार के कानों तक पहुचाये.