Friday, March 5, 2010

हांकी की प्रगति के लिए और अधिक प्रयास की जर्रूरत

वर्षों बाद देश के लोगों को हांकी की सुध आयी जो एक सकारात्मक कदम था,जिसके चलते विश्व कप का आयोजन इस समय दिल्ली में चल रहा है, प्राम्भिक मुकाबले में भारत की टीम ने अपने चिर प्रतिद्वंदी पाकिस्तान को ४-१ से पराजित किया परंतु विश्व हांकी फेडेरशन में जो एशियाई हांकी को समाप्त करने का सिलसिला वर्षों पहले प्राम्भ हुआ था उसी के कारण विश्व फेडरेशन में आज भी भारतीय प्रतिनिधित्व नहीं है जिसकी साजिश के तहत भारत की टीम के एक अत्यंत महत्वपूर्ण खिलाडी शिवेंद्र सिंह को दो मैचों के लिए बिना किसी शिकायत के और बिना रेफरी तथा एम्पायर के निर्णय के हुए, निष्कासित कर दिया गया जिससे टीम की लय बिगड़ गयी,और टीम आष्ट्रेलिया और स्पेन की टीमों से हार गयी। परंतु बहुत घबराने की बात नहीं वर्षों बाद आम जनता ने हांकी के खेल को पुनः हाथों हाथ लिया है यह एक शुभ लक्षण है ,आगे देश की टीम और अच्छा प्रदर्शन करेगी ,इस बात का विश्वास अवश्य हो गया है।

महिला आरक्षण स्वागत योग्य कदम

आगामी ०८ मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के शुभ अवसर पर संभवतः केन्द्रीय सरकार राज्य सभा में ३३ प्रतिशत महिला आरक्षण का विधेयक प्रस्तुत करने और उसे सदन से पारित करने की भूमिका एक स्वागत योग्य कदम है। जिसके लिए सत्ताधारी दल के सदस्यों ,भारतीय जनता पार्टी ,और साम्यवादी दलों का सहयोग उन्हें प्राप्त होरहा है,बिल पास करने में इन दलों का महत्वपूर्ण सहयोग भी स्वागत योग्य है। वैसे महिलाएं देश और विश्व की आधी दुनिया मणी जाती हैं,हमें उन्हें ५० प्रतिशत आरक्षण देना चाहिए । परंतु शुरुआत के रूप में ३३ प्रतिशत आरक्षण स्वागत योग्य है।

Wednesday, March 3, 2010

मंहगाई पर नियंत्रण के विपरीत केन्द्रीय बजट से और बढ़ने की सम्भावना

फरवरी की २६ तारिख को जब केन्द्रीय बजट पेश करने वित्त मंत्री श्री प्रणब मुख़र्जी लोक सभा में आये उस समय देश के सभी आम नागरिक ,उद्योपति,अर्थशाष्त्री पेशो पेश में थे कि माननीय वित्त मंत्री महोदय आगामी वर्ष के बजट में क्या-क्या सौगात देने आये है परंतु आशा के विपरीत बजट के प्राविधान से देश पर आगामी वर्ष के आरम्भ से ही मंहगाई बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हो गयी।पेट्रोल,डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में वृद्धि से पेट्रोल और डीजल के मूल्य में बजट की मध्य रात्रि से ही मूल्य वृद्धि होगई । अगले दिन यु० पी० ए० के सहभागी दल तरीन मूल कांग्रेस की अध्यक्ष सुश्री ममता बनर्जी ने कोल्कता में ऐसा माहौल बनाया कि वे केंद्र सर्कार को बढे मूल्ल्य रोकने की पहल करेंगी परंतु वापस दिल्ली पहुचने पर उनके तेवर भी ठंढे पड़ गए और बाद में प्रधान मंत्री और यु० पी० ए० की चेयर पर्सन श्री मति सोनिया गाँधी ने भी पेट्रोल और डीजल पर बढ़ाये गए दरों में कोई कमी नहीं करने की बात कर दिया है। इससे पूरे देश में एक बार फिर महगाई वृद्धि का नया क्रम शुरू हो जायेगा। जो शासक दल के पक्ष के विपरीत जा रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि सत्ता में बैठे लोगों ने आम आदमी और इस देश की कृषि अर्थ व्यवस्था को नष्ट करने का बीड़ा उठा लिया है। परंतु सबसे महत्त्व पूर्ण तथ्य यह है कि इन अप्रजातांत्रिक निर्णयों के बाद भी देश की जनता की कानों पर जूनnअहिं रेंग रही है और विपक्षी दलों ने प्रारंभिक एकता प्रदर्शन जिसके तहत उनके द्वारा बजट भाषण का सामूहिक सदन से बहिष्कार के अतिरिक्त अन्य कोई परिणाम सामने नहीं आया ,इसे विडंबना के अतिरिक्त और कुछ नहीं कहा जा सकता है,देश में शासक और शासित का यह आचरण देश के लोगों के ईश्वर में घोर आस्थावान होने को प्रदर्शित कर रहा है।देखें कब तक इस तरह की स्थिति बनी रहती है।

Tuesday, March 2, 2010

विलम्ब के लिए क्षमा याचना

मित्रों विगत ०१ दिसम्बर इ बाद से मैं ब्लॉग पर कुछ लिख न सका जिसका कारण मेरा अस्वस्थ होना था,दिसम्बर के प्रारंभ से ही मैं घुटने के दर्द के कारण बहुत परेशान था जिस कारण मैं आप सब से अपने विचारों की अभिव्यक्ति नहीं कर सका।जिसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ और आशा करता हूँ कि आप मुझे माफ कर देंगे। अब स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है,अब कुछ ही दिनों में विचारों की अभिव्यक्ति शुरू कर दूंगा। इस अवधि में बहुत सी राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय घटनाएँ हुई जिनका आने वाले समय में संसार में काफी ज्यादा प्रभाव होना प्रायः निश्चित है। जिस पर विचारों का आदान प्रदान अनिवार्य है। एक सजग नागरिक और चिन्तक के लिए इन विषयों पर विचार व्यक्त कर देश और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को पूरा सर्वदा उचित है।
कृपया प्रतीक्षा करें।

Tuesday, December 1, 2009

चीन का भारतीय सीमा में हस्तक्षेप

जैसा की मैंने भारत सरकार को चीन से सतर्क रहने के लिए अपने पिछले पोस्ट में लिखा था वही कल प्रत्यक्ष रूप से लद्दाख में हुआ ,कल चीन की सेना के दस्ते ने भारतीय सीमा में अंदर घुस कर सीमा पर भारत सरकार द्वारा एक सड़क का निर्माण कराया जा रहा था ,उसे इन सैनिकों ने जबरदस्ती से रोक दिया गयाजिसका भारतीय सरकार ने अभी तक कोई तो विरोध किया और ही सड़क निर्माण का काम करने वाले मजदूरों और कर्मियों को किसी प्रकार की सुरक्षा मुहैया किया ,जो सरकार की अक्षमता का स्पष्ट उदाहरण हैमैंने अपने पिछले लेख में यह भी लिखा था की चीन पहले किसी भी पड़ोसी देश की किसी भू -भाग पर पहले विवाद करता है और बाद में वहां हस्तक्षेप कर देता है,यही घटना कल लद्दाख में घटित हुई ,पहले से ही चीन ने अरुणांचल प्रदेश के तवांग और कश्मीर से जुड़े लद्दाख पर अपना अधिकार जाता कर विवादित क्षेत्र बनाया और अब वहां सीधा हस्तक्षेप कर दिया .हमारी सरकार कब राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर इस तरह का नकारात्मक रवैया अपनाती रहेगी

Saturday, November 28, 2009

क्या हम २६/११ से कुछ सबक लेंगे

इस वर्ष २६/११ /२००८ की घटना के पूरे एक वर्ष होने पर क्या देश ने कुछ सबक लिया या नहीं इस विषय पर मैं आज आप से चर्चा करना चाहता हूँ या यूँ कहिये की बात कहना चाहता हूँ । हमने घटना की बरसी के दिन मोमबत्तियां जलाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी परन्तु क्या देश हम किसी भी प्रकार की उसी तरह की भविष्य में होने वाली घटना का मुकाबला करने को तैयार हैं ,इस बात की परख करनी होगी,इस प्रकार की किसी तैयारी में देश की सरकार की इच्छा शक्ति का दृढ़ होना और उसकी जानकारी देना सरकार का दायित्व हैं । यदि हम विगत पूरे वर्ष सरकार के द्वारा किए गए प्रयासों को देखें तो हम पाएंगे की सामान्यतया ऐसे मौकों पर केन्द्र सरकार द्वारा राज्यों को जिम्मेदार ठहराकर अपना दमन साफ़ कर लेती है परन्तु पूरे वर्ष भारत सरकार ने पाकिस्तान सरकार से मुंबई हमले में शामिल पाकिस्तानी एजेंसियों के ऊपर कार्यवाही की दरखास्त करता रहा और पाकिस्तान की सरकार ने कभी अजहर मसूद और कभी सईद आतंकवाद में शामिल मानते हुए गिरफ्तार किया और बाद में पाकिस्तान की न्यायपालिका ने इन्हे बिना सबूत के इनकी गिरफ़्तारी /नज़रबंदी को गैर कानूनी ठहराते हुए इन खूंखार आतंकवादियों को आज़ाद कर दिया गया । इन सबसे यह साबित होता है की अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादियों से निपटने में देश की सरकार नाकामयाब सिद्ध हुई । शायद बहुत कठोर कार्यवाही करने की इच्छा शक्ति की कमी इसका कारण है.बार बार सरकार पड़ोसी देश में पाले और पोसे जा रहे आतंकवाद के ठेकेदारों को रोकने में असफल रही है .यहाँ यह बताना उचित होगा की पाकिस्तान में शासन करने वालों में भी इतना बल नहीं है जो इन सबको रोक सके। भारत सरकार ने परमाणु समझौता अमेरिका से किया जिसके आधार पर भी वह पाकिस्तान पर दबाव बना पाने में सफल हो सका जो निश्चित रूप से सरकार की इच्छा शक्ति पर प्रश्न चिन्ह लगता है।
अब यहाँ घरेलू मोर्चे पर देखे तो हम पाते हैं की जिस मुंबई में इतनी बड़ी त्रासदी हुई उसी मुंबई में घटना के बाद मनसे के लोगों ने उत्तर भारतीयों के विरुद्ध मोर्चा खोला और उनकी इस कार्यवाही पर महाराष्ट की सरकार ने कोई ठोस कार्यवाही नहीं किया जिससे मुंबई में रहने वाले समस्त भारतवासी को यह विश्वास दिला सकने में असमर्थ रही। उल्लेखनीय यह है की महाराष्ट्र में कांग्रेस की सरकार है ।
दूसरी तरफ़ देश में सांप्रदायिक सद्भाव बढ़ाने की जगह भारत सरकार ने सत्रह साल की कवायद के बाद लिब्राहम आयोग की रिपोर्ट जरी कर अपने राजनीतिक दुश्मनों को मात देने का प्रयास जितनी दृढ़ता से किया उतना प्रधान मंत्री महोदय के आतंकवाद से लड़ने की कोशिश में दम नहीं दिखा रहे हैं।

Wednesday, November 18, 2009

भारत को चीन की भावी योजना से सतर्कता आवश्यक

चीन आज विश्व के पाँच महा शक्तियों में सिर्फ़ एक होकर विश्व की सबसे बड़ी जनसंख्या वाले एशिया महाद्वीप के राष्टों के लिए चुनौती बन कर सामने आया है ,एक तरफ़ उसकी सामरिक मह्त्वाकांछा दूसरी तरफ़ आर्थिक महाशक्ति बंनने की है ,चीनी नेतृत्त्व इन दोनों को शीघ्रातिशीघ्र पाने के लिए प्रयत्न शील हैं ,उनके इस कार्य में आने वाले सभी देश चाहे अमेरिका हो रूस हो अथवा भारत या जापान सभी की रणनीति को विफल करने का उनके द्वारा चतुर्दिक प्रयास बहुत प्रयत्न के साथ किया जा रहा है,चीन के इस प्रयास में जो भी देश अडंगा लगाने का प्रयास करेगा उससे वह पूरी तरह से निपट लेने के लिए तैयारी कर रहा हैइसी योजना के अंतर्गत उसने भारत के अरुणांचल राज्य स्थित तवांग को चीन का भाग घोषित करते हुए भारत सरकार से अपना विरोध दर्ज किया ,दूसरी तरफ़ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के हिस्से में पाकिस्तान के साथ मिलकर कई विकास योजना में सहयोग कर रहा है जिससे भविष्य में वह भारत को घेरने का प्रयास कर सकेउधर सूदूर पूर्व में वह जापान के आर्थिक आधिपत्य को तोड़ने का प्रयास कर रहा है,जापान को रोकने का तात्पर्य अमरीका की आर्थिक दशा को प्रभावित करना हैचीन द्वारा रूस के राजनीतिक और सामरिक प्रभाव कम करने के लिए मध्य एशिया के देशों पर भी लगातार दबाव बना रहा है
चीन की सभी नीतियों पर भारत को कड़ी और पैनी दृष्टि सदैव बनाये रखते हुए सतर्कता की आवश्यकता है